Paanipat

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Paanipat

Number of Pages : 646
Published In : 2016
Available In : Hardbound
ISBN : 978-93-263-5135-5
Author: Vishwas Patil

Overview

कथाकारों के लिए इतिहास का सर्जनात्मक इस्तेमाल हमेशा एक चुनौती रहा है। सन् 1761 का पानीपत का तीसरा युद्ध तो लेखकों के सााि ही इतिहास-प्रेमियों के लिए भी कौतूहल का विषय रहा है। यह प्रीतिकर संयोग है कि मराठी के अग्रणीउपन्यासकार विश्वास पाटील ने इस चुनौती को स्वीकार किया और कलात्मक समग्रता और प्रतीकात्मकता के साथ पानीपत की सर्जना की। पानीपत ऐतिहासिक उपन्यास है, जिसका लेखन-प्रकाशन भारतीय साहित्य की एक ऐतिहासिक महत्व की घटना है। नवम्बर 1988 में प्रकाशित होते ही इस उपन्यास को पाठक-समाज में उद्भुत यश और लोकप्रियता मिली और विश्वास पाअील भी मराठी साहित्य-जगत में शिखर पर प्रतिष्ठित हो गये। कहा जा सकता है कि भारतीय ऐतिहासिक उपन्यास लेखन में पानीपत हर दृष्टि से एक जीवन्त प्रतिमान है।

Price     Rs 480

कथाकारों के लिए इतिहास का सर्जनात्मक इस्तेमाल हमेशा एक चुनौती रहा है। सन् 1761 का पानीपत का तीसरा युद्ध तो लेखकों के सााि ही इतिहास-प्रेमियों के लिए भी कौतूहल का विषय रहा है। यह प्रीतिकर संयोग है कि मराठी के अग्रणीउपन्यासकार विश्वास पाटील ने इस चुनौती को स्वीकार किया और कलात्मक समग्रता और प्रतीकात्मकता के साथ पानीपत की सर्जना की। पानीपत ऐतिहासिक उपन्यास है, जिसका लेखन-प्रकाशन भारतीय साहित्य की एक ऐतिहासिक महत्व की घटना है। नवम्बर 1988 में प्रकाशित होते ही इस उपन्यास को पाठक-समाज में उद्भुत यश और लोकप्रियता मिली और विश्वास पाअील भी मराठी साहित्य-जगत में शिखर पर प्रतिष्ठित हो गये। कहा जा सकता है कि भारतीय ऐतिहासिक उपन्यास लेखन में पानीपत हर दृष्टि से एक जीवन्त प्रतिमान है।
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