Hanslee Baank Kee Upakatha

view cart
Availability : Stock
  • 0 customer review

Hanslee Baank Kee Upakatha

Number of Pages : 374
Published In : 2004
Available In : Paperback
ISBN : 81-263-0184-4
Author: Tarashankar Bandyopadhyaya

Overview

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित यशस्वी बांग्ला उपन्यासकार ताराशंकर बन्द्योपाध्याय का अत्यंत महत्त्वपूर्ण उपन्यास है—हँसली बाँक की उपकथा। इसमें वीरभूम के राढ़ अंचल की लालमाटी से रँगी गाथा है, जिसके कई रंग और रूप हैं। वहीं अब तक जो कुछ होता आया है, यह सब दैव प्रेरित ही है। दैव के कोप या दैव की दया में ही उसकी नियति और गति है। ताराशंकर बाबू इस अभिशाप के साक्षी रहे थे और उन्होंने बहुत निकट से इस अन्ध आस्था के प्रति सारे लोक को समर्पित या असहाय होते देखा था। इस आदिकालीन मनोवृत्ति को उसी अंचल की बढिय़ा सुचाँद के क्षरा इस उपन्यास में स्थापित किया गया है। इस महत्त्वपूर्ण उपन्यास को ‘गणदेवता’ की अगली कथा शृंखला के रूप में देखा जाना चाहिए।

Price     Rs 100

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित यशस्वी बांग्ला उपन्यासकार ताराशंकर बन्द्योपाध्याय का अत्यंत महत्त्वपूर्ण उपन्यास है—हँसली बाँक की उपकथा। इसमें वीरभूम के राढ़ अंचल की लालमाटी से रँगी गाथा है, जिसके कई रंग और रूप हैं। वहीं अब तक जो कुछ होता आया है, यह सब दैव प्रेरित ही है। दैव के कोप या दैव की दया में ही उसकी नियति और गति है। ताराशंकर बाबू इस अभिशाप के साक्षी रहे थे और उन्होंने बहुत निकट से इस अन्ध आस्था के प्रति सारे लोक को समर्पित या असहाय होते देखा था। इस आदिकालीन मनोवृत्ति को उसी अंचल की बढिय़ा सुचाँद के क्षरा इस उपन्यास में स्थापित किया गया है। इस महत्त्वपूर्ण उपन्यास को ‘गणदेवता’ की अगली कथा शृंखला के रूप में देखा जाना चाहिए।
Add a Review
Your Rating