Suvarnalata

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Suvarnalata

Number of Pages : 464
Published In : 2015
Available In : Paperback
ISBN : 978-81-263-3028-7
Author: Ashapurna Devi

Overview

बांग्ला कथा साहित्य की कालजयी रचनाकार श्रीमती आशापूर्णा देवी की लेखनी से सृजित उपन्यास 'सुवर्णलता' अपनी कथा-वस्तु और शैली-शिल्प में इतना अदभुत है कि पढ़ना प्रारंभ करने के बाद इसे छोड़ पाना कठिन है उपन्यास समाप्त करने के बाद भी इसके पात्र-- सुवर्णलता और सुवर्णलता के जीवन तथा परिवेश से सम्बद्ध पात्र - मन पर छाये रहते है क्योकि ये सब इतने जीते-जागते चरित्र हैं इनके कार्यकलाप, मनोभाव, रहन-सहन, बातचीत सब कुछ इतना सहज, स्वाभाविक है और मानव-मन के घात-प्रतिघात इतने मनोवैज्ञानिक हैं की पाठक को वे अपने ही प्रतीत होते हैं निःसंदेह इस उपन्यास में लेखिका का दृष्टिकोण एक बहुआयामी विद्रोहिणी का नज़र आता हैं 

Price     Rs 300

बांग्ला कथा साहित्य की कालजयी रचनाकार श्रीमती आशापूर्णा देवी की लेखनी से सृजित उपन्यास 'सुवर्णलता' अपनी कथा-वस्तु और शैली-शिल्प में इतना अदभुत है कि पढ़ना प्रारंभ करने के बाद इसे छोड़ पाना कठिन है उपन्यास समाप्त करने के बाद भी इसके पात्र-- सुवर्णलता और सुवर्णलता के जीवन तथा परिवेश से सम्बद्ध पात्र - मन पर छाये रहते है क्योकि ये सब इतने जीते-जागते चरित्र हैं इनके कार्यकलाप, मनोभाव, रहन-सहन, बातचीत सब कुछ इतना सहज, स्वाभाविक है और मानव-मन के घात-प्रतिघात इतने मनोवैज्ञानिक हैं की पाठक को वे अपने ही प्रतीत होते हैं निःसंदेह इस उपन्यास में लेखिका का दृष्टिकोण एक बहुआयामी विद्रोहिणी का नज़र आता हैं
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