Lal Nadee

view cart
Availability : Stock
  • 0 customer review

Lal Nadee

Number of Pages : 216
Published In : 2016
Available In : Hardbound
ISBN : 8126310065
Author: Indira Goswami

Overview

भारतीय ज्ञानपीठ से पुरस्कृत असमिया की बहुचर्चित लेखिका इन्दिरा गोस्वामी की रचनाओं में जैसे पूरा असम क्षेत्र धड़कता हुआ महसूस होता है। उनमें असम का सांस्कृतिक और सामाजिक इतिहास नजर आता है। इन्दिरा जी की रचनाओं, विशेषकर कहानियों में चित्रित असमी जीवन के विविध परिदृश्यों से गुजरते हुए हमें लगता है कि जैसे हम खुद वहाँ की यात्रा पर निकल पड़े हों। 'लाल नदी’ की कहानियाँ आम असमी जनता के दुख-दर्द, आशा-आकांक्षा, राग-विराग, संघात-संघर्ष को उजागर करने के साथ ही हमारे मानस लोक में एक ऐसे समाज का प्रतिबिम्ब रच देती है, जिनके बारे में हमारी जानकारी बहुत सीमित है। इन्दिरा जी सिर्फ कहानी नहीं लिखतीं, वे समाज का अन्तरंग विश्लेषण भी प्रस्तुत कर देती हैक्ं। इसलिए उनकी कहानियाँ पढ़कर पाठक केवल मुग्ध ही नहीं होता बल्कि उद्वेलित भी होता है। वे पाठकों को किसी जादुई यथार्थ में नहीं ले जातीं बल्कि सच्चाई के रू-ब-रू खड़ा कर देती हैं। इन्दिरा गोस्वामी की कहानियाँ सिर्फ कथ्य की दृष्टिï से ही नहीं, अभिव्यक्ति क्षमता में भी अपना सानी नहीं रखतीं। कथा को वे धीरे-धीरे मन्द आँच पर पकाती हुई निष्पत्ति पर पहुँचाती हैं, जिनका आस्वाद देर तक बना रहता है। अधिकांश कहानियाँ उनकी क्लासिकल शैली का निदर्शन है। प्रस्तुत संग्रह की कहानियों का चयन स्वयं इन्दिरा जी ने किया है। निश्चय ही उनकी दृष्टिï से तो ये उत्कृष्टï हैं ही, पाठकों की राय भी इसमें शामिल है, जिसे लेखक से ज्यादा कौन जानता है?

Price     Rs 200

भारतीय ज्ञानपीठ से पुरस्कृत असमिया की बहुचर्चित लेखिका इन्दिरा गोस्वामी की रचनाओं में जैसे पूरा असम क्षेत्र धड़कता हुआ महसूस होता है। उनमें असम का सांस्कृतिक और सामाजिक इतिहास नजर आता है। इन्दिरा जी की रचनाओं, विशेषकर कहानियों में चित्रित असमी जीवन के विविध परिदृश्यों से गुजरते हुए हमें लगता है कि जैसे हम खुद वहाँ की यात्रा पर निकल पड़े हों। 'लाल नदी’ की कहानियाँ आम असमी जनता के दुख-दर्द, आशा-आकांक्षा, राग-विराग, संघात-संघर्ष को उजागर करने के साथ ही हमारे मानस लोक में एक ऐसे समाज का प्रतिबिम्ब रच देती है, जिनके बारे में हमारी जानकारी बहुत सीमित है। इन्दिरा जी सिर्फ कहानी नहीं लिखतीं, वे समाज का अन्तरंग विश्लेषण भी प्रस्तुत कर देती हैक्ं। इसलिए उनकी कहानियाँ पढ़कर पाठक केवल मुग्ध ही नहीं होता बल्कि उद्वेलित भी होता है। वे पाठकों को किसी जादुई यथार्थ में नहीं ले जातीं बल्कि सच्चाई के रू-ब-रू खड़ा कर देती हैं। इन्दिरा गोस्वामी की कहानियाँ सिर्फ कथ्य की दृष्टिï से ही नहीं, अभिव्यक्ति क्षमता में भी अपना सानी नहीं रखतीं। कथा को वे धीरे-धीरे मन्द आँच पर पकाती हुई निष्पत्ति पर पहुँचाती हैं, जिनका आस्वाद देर तक बना रहता है। अधिकांश कहानियाँ उनकी क्लासिकल शैली का निदर्शन है। प्रस्तुत संग्रह की कहानियों का चयन स्वयं इन्दिरा जी ने किया है। निश्चय ही उनकी दृष्टिï से तो ये उत्कृष्टï हैं ही, पाठकों की राय भी इसमें शामिल है, जिसे लेखक से ज्यादा कौन जानता है?
Add a Review
Your Rating