Kuchh Aapbiti Kuchh Jagbiti

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Kuchh Aapbiti Kuchh Jagbiti

Number of Pages : 116
Published In : 2019
Available In : Hardbound
ISBN : 9789387919761
Author: Anumita Sharma

Overview

कुछ आपबीती कुछ जगबीती संग्रह में एक लम्बी और नौ छोटी कहानियाँ है। शीर्षक कहानी, कुछ आपबीती कुछ जगबीती, जो अंतिम और सबसे लम्बी कहानी हैं, उसमें भी छ छोटी कहानियाँ है। उसके छ पात्र एक जगह मिलते हैं और अपनी-अपनी अनोखी कहानियाँ सुनाते हैं जिन्हें किसी एक शैली में नहीं बांधा जा सकता। किताब की ज़्यादातर कहानियों के केंद्र में ïअकेलापन है। पात्र स्त्रियाँ भी हैं, और पुरुष भी, जो अकेलेपन से जूझ रहे हैं। कुछ घटनाएँ गाँव के परिवेश की हैं और कुछ शहर और महानगर की। हर तरह के कथानक में कुछ साधारण से प्रतीत होने वाले असाधारण किरदार हैं, एक-दो कहानियों में उनके साथ कुछ अद्भुत घटित होता है, परन्तु जो अलौकिक अनुभव हैं वो वास्तविक जीवन की प्रतिक्रिया में होते हैं, और कभी-कभी यथार्थ और कल्पना के बीच की महीन रेखा मिट सी जाती है। कहानियों में आप कई विलक्षण स्त्रियों से मिलेंगे, जो अपनी शर्तों पर अलग तरह की जि़ंदगी जी रही हैं। प्रेम की बातें भी होती हैं; कुछ प्रेम में हारे हुए पात्र हैं और किसी को प्रेम की तलाश है। विषय अलग-अलग हैं परन्तु किसी ना किसी तरह से हर कहानी के मूल में अकेलेपन की वेदना है। 

Price     Rs 220

कुछ आपबीती कुछ जगबीती संग्रह में एक लम्बी और नौ छोटी कहानियाँ है। शीर्षक कहानी, कुछ आपबीती कुछ जगबीती, जो अंतिम और सबसे लम्बी कहानी हैं, उसमें भी छ छोटी कहानियाँ है। उसके छ पात्र एक जगह मिलते हैं और अपनी-अपनी अनोखी कहानियाँ सुनाते हैं जिन्हें किसी एक शैली में नहीं बांधा जा सकता। किताब की ज़्यादातर कहानियों के केंद्र में ïअकेलापन है। पात्र स्त्रियाँ भी हैं, और पुरुष भी, जो अकेलेपन से जूझ रहे हैं। कुछ घटनाएँ गाँव के परिवेश की हैं और कुछ शहर और महानगर की। हर तरह के कथानक में कुछ साधारण से प्रतीत होने वाले असाधारण किरदार हैं, एक-दो कहानियों में उनके साथ कुछ अद्भुत घटित होता है, परन्तु जो अलौकिक अनुभव हैं वो वास्तविक जीवन की प्रतिक्रिया में होते हैं, और कभी-कभी यथार्थ और कल्पना के बीच की महीन रेखा मिट सी जाती है। कहानियों में आप कई विलक्षण स्त्रियों से मिलेंगे, जो अपनी शर्तों पर अलग तरह की जि़ंदगी जी रही हैं। प्रेम की बातें भी होती हैं; कुछ प्रेम में हारे हुए पात्र हैं और किसी को प्रेम की तलाश है। विषय अलग-अलग हैं परन्तु किसी ना किसी तरह से हर कहानी के मूल में अकेलेपन की वेदना है। 
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