Dari Hui Ladki

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Dari Hui Ladki

Number of Pages : 180
Published In : 2016
Available In : Hardbound
ISBN : 978-93-263-5505-6
Author: Gyanprakash Vivek

Overview

यह उपन्यास दुष्कर्म से पीडि़त एक युवती की 'साइकी’, अवसाद, ख़ालिद, क्षोभ, भय, एकान्त और असुरक्षा की भावना से घिरी हुई है। ज्ञानप्रकाश विवेक ने इस उपन्यास के माध्यम से समाज के सामने एक ऐसे पक्ष की उद्घाटित किया है, जो सामान्यत: समाज में कम ही नजर आता है। ज्ञान प्रकाश विवेक चुपचाप रह कर रचना करते रहनेवाले सज़ीदा लेखक हैं। इस उपन्यास के मुख्य पात्रों—राजन और नन्दिनी के माध्यम से एक ऐसे लोक का निर्माण करते हैं, जहाँ खामोशी है, सहानुभूति है, प्रेम है। प्रेम के स्वीकार्यता की चाहत है....पर प्रेम को व्यक्त करने का साहस...शायद नहीं है? उपन्यासकार ने मानवीयता के तमाम तहों को खोलने का प्रयास किया है। जहाँ व्यक्त न होते हुए भी एक प्रेम विद्यमान है। और अपनी परकाष्ठा को पाने को आतुर है। बलात्कार जैसी घटना से जूझ रही नायिका के जीवन जीने  की जिजीविषा और नायक की सकारात्मक सोच इस उपन्यास को विशिष्ठ बनाता है।

Price     Rs 300

यह उपन्यास दुष्कर्म से पीडि़त एक युवती की 'साइकी’, अवसाद, ख़ालिद, क्षोभ, भय, एकान्त और असुरक्षा की भावना से घिरी हुई है। ज्ञानप्रकाश विवेक ने इस उपन्यास के माध्यम से समाज के सामने एक ऐसे पक्ष की उद्घाटित किया है, जो सामान्यत: समाज में कम ही नजर आता है। ज्ञान प्रकाश विवेक चुपचाप रह कर रचना करते रहनेवाले सज़ीदा लेखक हैं। इस उपन्यास के मुख्य पात्रों—राजन और नन्दिनी के माध्यम से एक ऐसे लोक का निर्माण करते हैं, जहाँ खामोशी है, सहानुभूति है, प्रेम है। प्रेम के स्वीकार्यता की चाहत है....पर प्रेम को व्यक्त करने का साहस...शायद नहीं है? उपन्यासकार ने मानवीयता के तमाम तहों को खोलने का प्रयास किया है। जहाँ व्यक्त न होते हुए भी एक प्रेम विद्यमान है। और अपनी परकाष्ठा को पाने को आतुर है। बलात्कार जैसी घटना से जूझ रही नायिका के जीवन जीने  की जिजीविषा और नायक की सकारात्मक सोच इस उपन्यास को विशिष्ठ बनाता है।
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