Amba Nahin Mein Bheeshma

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Amba Nahin Mein Bheeshma

Number of Pages : 160
Published In : 2017
Available In : Paperback
ISBN : 81-263-1156-8
Author: Chitra Chaturvedi 'Kartika'

Overview

भीष्मा यानी अम्बा महाभारत की वह तेजस्विनी नारी है जो अपने प्रति अन्याय के प्रतिकार के लिए जी-जीकर मरती रही। इस सत्रह वर्षीय किशोरी ने किसी साधारण व्यकित को नहीं, युग के प्रचंड महारथी, अज्ञेय योद्धा, श्रेष्ठï प्रशासक तथा राजधर्म के अद्वितीय प्रवाचक भीष्म को चुनौती दी थी। स्वयंवर-बेला में अपने मनोनुकूल पति का वरण करने को आतुर अम्बा का, उसकी दो अनुजाओं अम्बिका तथा अम्बालिका सहित भीष्म ने हरण किया था—अपने अनुज से उनका विवाह करने हेतुद्घ इसके बाद तो समाज को रूढिग़्रस्त मानसिकता के कारण अम्बा के साथ ऐसी घटनाएँ घटती चली गयीं कि वह सदा के लिए पति तथा परिवार-सुख से वंचित ही हो गयी। भीष्म दीर्घजीवी थे। अम्बा तीनों जन्मों तक संघर्षरत रही। भीष्म और अम्बा के बीच इस शीतयुद्ध का अन्त महाभारत-युद्ध में तब हुआ जब अम्बा शिखंडी बनकर कुरुक्षेत्र में अवतरित हुई। प्रस्तुत पुस्तक वस्तुत: अम्बा को तर्पण है, जलांजलि के रूप मे ंविनयांजलि है।

Price     Rs 230

भीष्मा यानी अम्बा महाभारत की वह तेजस्विनी नारी है जो अपने प्रति अन्याय के प्रतिकार के लिए जी-जीकर मरती रही। इस सत्रह वर्षीय किशोरी ने किसी साधारण व्यकित को नहीं, युग के प्रचंड महारथी, अज्ञेय योद्धा, श्रेष्ठï प्रशासक तथा राजधर्म के अद्वितीय प्रवाचक भीष्म को चुनौती दी थी। स्वयंवर-बेला में अपने मनोनुकूल पति का वरण करने को आतुर अम्बा का, उसकी दो अनुजाओं अम्बिका तथा अम्बालिका सहित भीष्म ने हरण किया था—अपने अनुज से उनका विवाह करने हेतुद्घ इसके बाद तो समाज को रूढिग़्रस्त मानसिकता के कारण अम्बा के साथ ऐसी घटनाएँ घटती चली गयीं कि वह सदा के लिए पति तथा परिवार-सुख से वंचित ही हो गयी। भीष्म दीर्घजीवी थे। अम्बा तीनों जन्मों तक संघर्षरत रही। भीष्म और अम्बा के बीच इस शीतयुद्ध का अन्त महाभारत-युद्ध में तब हुआ जब अम्बा शिखंडी बनकर कुरुक्षेत्र में अवतरित हुई। प्रस्तुत पुस्तक वस्तुत: अम्बा को तर्पण है, जलांजलि के रूप मे ंविनयांजलि है।
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